पुराने दिन
यदि आपने : बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी है। दलान को समझा है। ओसारा जानते हैं। दुवारे पर कचहरी (पंचायत) देखी है। राम राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी किये हैं। दतुअन किये हैं। दिन में दाल-भात-तरकारी खाये हैं। <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1453345199357042" crossorigin="anonymous"></script> संझा माई की किरिया का मतलब समझते हैं। रात में दिया और लालटेम जलाये हैं। बरहम बाबा का स्थान आपको मालूम है। डीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैं। तलाव (ताल) के किनारे और बगइचा के बगल वाले पीपर और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैं। बसुला समझते हैं। फरूहा जानते हैं। कुदार देखे हैं। <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1453345199357042" crossorigin="anonymous"></script> दुपहरिया मे घूम-घूम कर आम, जामुन, अमरूद खाये हैं। बारी बगइचा की जिंदगी जिये हैं। चिलचिलात...